
विशेष डेस्क
संसद के शीतकालीन सत्र (दिसंबर 2025) में सोने और चांदी की रिकॉर्ड ऊंचाई वाली कीमतों को लेकर सवाल उठा। सोना और चांदी दोनों ने इस साल नई ऊंचाइयां छुई हैं – सोना करीब 63% और चांदी 118% तक महंगी हो चुकी है। मुख्य सवाल यह था कि “क्या सरकार इन कीमतों पर नियंत्रण या लगाम लगाने का कोई कदम उठाएगी, जैसे रिटेल रेट्स को रेगुलेट करना।
सरकार का जवाब क्या है ?
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में लिखित जवाब में स्पष्ट किया “भारत में सोने-चांदी की कीमतें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तय होती हैं। ये कीमतें अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और सुरक्षित निवेश की मांग पर निर्भर करती हैं। सरकार कीमतों का निर्धारण नहीं करती और न ही इनमें सीधे हस्तक्षेप करती है। कीमतें बाजार द्वारा तय होती हैं। कीमतों में बढ़ोतरी से उन परिवारों को फायदा होता है जिनके पास पहले से सोना-चांदी है, क्योंकि उनकी संपत्ति का मूल्य बढ़ जाता है। इससे घरेलू संपत्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
सरकार ने यह भी बताया कि “जुलाई 2024 में सोने के आयात पर कस्टम ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% किया गया था, जिससे स्मगलिंग पर लगाम लगी और कीमतों में उतार-चढ़ाव कम हुआ। हालांकि, कीमतों को सीधे नियंत्रित करने का कोई प्लान नहीं है।
कीमतों में उछाल की वजह
वैश्विक तनाव (जैसे युद्ध, अनिश्चितता) से निवेशक सोने-चांदी जैसे सुरक्षित एसेट्स की ओर मुड़ रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में सितंबर तक भारत ने अरबों डॉलर का सोना-चांदी आयात किया, जो मजबूत घरेलू मांग दिखाता है। सरकार का रुख कोई नया प्रतिबंध या रेगुलेशन नहीं। बाजार को फ्री चलने देने की नीति। वर्तमान में सोना ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹1.92 लाख प्रति किलो के आसपास ट्रेड कर रही है (16 दिसंबर तक)।
यह मामला मुख्य रूप से कीमतों की वजह और प्रभाव पर केंद्रित रहा, न कि आयात शुल्क बढ़ाने या नए प्रतिबंध पर। अगर कीमतें और बढ़ेंगी तो आगे चर्चा हो सकती है, लेकिन फिलहाल सरकार ने हस्तक्षेप से इनकार किया है।