
सरल डेस्क
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अगस्त 2025 में निर्देश दिया था कि गर्भनिरोधक उत्पादों (जैसे कंडोम, बर्थ कंट्रोल पिल्स आदि) पर लगने वाले 18% जनरल सेल्स टैक्स (GST) को तुरंत हटाया जाए। इसका मकसद इन उत्पादों को सस्ता करके फैमिली प्लानिंग को बढ़ावा देना और देश की तेज जनसंख्या वृद्धि (वर्तमान में 2.55% सालाना, दुनिया में सबसे ज्यादा दरों में से एक) को नियंत्रित करना था।
IMF ने प्रस्ताव को किया खारिज !
प्रधानमंत्री के निर्देश पर फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) ने IMF के वॉशिंगटन हेडक्वार्टर्स से ईमेल और फिर वर्चुअल मीटिंग के जरिए अनुमति मांगी। FBR ने अनुमान लगाया कि GST हटाने से सरकारी राजस्व पर सिर्फ 400-600 मिलियन पाकिस्तानी रुपये का असर पड़ेगा। लेकिन IMF ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। IMF का कहना था कि चलते वित्तीय वर्ष (FY 2025-26) के बीच में कोई टैक्स रिलीफ नहीं दी जा सकती। यह सिर्फ अगले बजट (2026-27) में विचार किया जा सकता है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने सैनिटरी पैड्स और बेबी डायपर्स पर भी GST राहत की बात उठाई, लेकिन IMF ने इन्हें भी ठुकरा दिया, क्योंकि इससे टैक्स एनफोर्समेंट में दिक्कत और स्मगलिंग बढ़ने का खतरा बताया।
क्यों इनकार किया IMF ने ?
पाकिस्तान IMF के $7 बिलियन बेलआउट प्रोग्राम (37-महीने की Extended Fund Facility) के तहत है, जिसमें सख्त फिस्कल डिसिप्लिन (राजकोषीय अनुशासन) की शर्तें हैं। IMF नहीं चाहता कि बीच बजट में टैक्स कटौती से राजस्व लक्ष्य प्रभावित हों, खासकर जब FBR पहले से ही रेवेन्यू टारगेट पूरा करने के दबाव में है।
असर क्या होगा ?
कंडोम और अन्य गर्भनिरोधक उत्पाद महंगे बने रहेंगे, जिससे फैमिली प्लानिंग की पहुंच कम हो सकती है। पाकिस्तान में हर साल करीब 60 लाख लोग आबादी में जुड़ रहे हैं, और सस्ते गर्भनिरोधक न होने से जनसंख्या नियंत्रण की कोशिशों को झटका लगेगा। स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सार्वजनिक सेवाओं पर और बोझ पड़ेगा।
यह खबर 17-18 दिसंबर 2025 को पाकिस्तानी मीडिया (जैसे The News, Geo News, ProPakistani) में प्रमुखता से छपी। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था IMF की शर्तों पर काफी हद तक निर्भर है, और यह घटना दिखाती है कि बेलआउट प्रोग्राम के तहत कितनी सख्ती बरती जा रही है।