
सरल डेस्क
नई दिल्ली | इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा। पहली बार स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। यह बदलाव न केवल परंपरा में आधुनिकता का प्रतीक है, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता और मेक इन इंडिया अभियान की बड़ी उपलब्धि भी माना जा रहा है।
52 सेकंड में 21 गोले, आठ गनों का समन्वय
समारोह के दौरान आठ स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन एक साथ तैनात होंगी, जो महज 52 सेकंड में 21 गोले दागकर राष्ट्रपति को सलामी देंगी। इन गनों की सटीकता, तेज़ संचालन और विश्वसनीयता ने इन्हें इस सम्मानजनक जिम्मेदारी के लिए चुने जाने योग्य बनाया है।
ब्रिटिश 25-पाउंडर गनों की जगह लेंगी स्वदेशी तोपें
अब तक गणतंत्र दिवस परंपरागत रूप से ब्रिटिश जमाने की 25-पाउंडर गनों से सलामी दी जाती रही है। इस बार उनका स्थान स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन लेंगी। यह बदलाव भारत के औपनिवेशिक अतीत से आगे बढ़कर स्वदेशी तकनीक पर भरोसे का स्पष्ट संकेत है।
ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में साबित हुईं प्रभावी
इन स्वदेशी तोपों की क्षमताएं केवल परेड तक सीमित नहीं हैं। हाल ही में ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान इन गनों ने पाकिस्तान स्थित आतंकी कैंपों के खिलाफ प्रभावी प्रदर्शन किया था। सटीक लक्ष्यभेदन और तेज़ तैनाती क्षमता के कारण इन तोपों ने सैन्य अभियानों में अपनी उपयोगिता सिद्ध की है।
हल्की, मोबाइल और अत्याधुनिक
105mm लाइट फील्ड गन को विशेष रूप से पहाड़ी और दुर्गम इलाकों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका हल्का वज़न, आसान परिवहन और कम समय में तैनाती इसे भारतीय सेना की जरूरतों के अनुरूप बनाते हैं। आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम और उच्च सटीकता इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं।
मेक इन इंडिया की मजबूत मिसाल
गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर स्वदेशी तोपों से सलामी देना मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की सोच को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेगा। यह कदम भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती क्षमता और तकनीकी आत्मविश्वास को रेखांकित करता है। कुल मिलाकर, इस वर्ष की 21 तोपों की सलामी केवल एक सैन्य परंपरा नहीं, बल्कि भारत की स्वदेशी शक्ति, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय आत्मगौरव का प्रतीक होगी। यह संदेश देगी कि भारत अब अपनी सुरक्षा और सम्मान के प्रतीकों को स्वयं गढ़ने में सक्षम है।