
स्पेशल डेस्क
बिहार विधानसभा चुनाव के बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और इंडिया गठबंधन के सीएम उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने कटिहार जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “सत्ता में आते ही वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंक दूंगा।” यह बयान मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र में दिया गया, जहां वक्फ कानून को लेकर पहले से ही संवेदनशीलता बनी हुई है। यह टिप्पणी विपक्षी दल आरजेडी की मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, लेकिन बीजेपी ने इसे “जंगलराज” की वापसी का संकेत बताते हुए निशाना साधा।
रैली और तेजस्वी का पूरा बयान
कटिहार रैली आरजेडी प्रत्याशी के समर्थन में आयोजित की गई थी। तेजस्वी ने अपनी स्पीच में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा “जब लालू यादव और राबड़ी देवी सत्ता में थे, तब आरएसएस बिहार में भाई-भाई के बीच फूट डालने की हिम्मत नहीं करता था। लेकिन नीतीश कुमार ने हमेशा सांप्रदायिक ताकतों का साथ दिया, जिससे राज्य और देश में नफरत फैली। कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।”
तेजस्वी ने कहा “इंडिया गठबंधन सत्ता में आया तो वक्फ (संशोधन) अधिनियम को कूड़ेदान में फेंक देंगे। यह कानून मुसलमानों के अधिकारों का उल्लंघन करता है।” सीमांचल क्षेत्र के विकास के लिए “सीमांचल विकास प्राधिकरण” गठित करने, वृद्धावस्था पेंशन को 400 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये करने, और पंचायती राज प्रतिनिधियों की भत्ते दोगुना करने का ऐलान।
तेजस्वी ने नीतीश कुमार सरकार पर 20 साल की नाकामी का आरोप लगाया और कहा कि “एनडीए उनकी चुनावी घोषणाओं की नकल कर रही है। रैली में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग मौजूद थे, जो सीमांचल (कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज) के चार जिलों में फैला है।
वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 क्या है ?
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को अप्रैल 2025 में संसद से पारित किया गया था। यह कानून वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने, महिलाओं और पिछड़े मुसलमानों को सशक्त बनाने, और गैर-मुस्लिम सदस्यों की सीमित भागीदारी सुनिश्चित करने का दावा करता है। प्रावधान केंद्रीय वक्फ परिषद में अधिकतम 4 गैर-मुस्लिम सदस्य। राज्य वक्फ बोर्ड में अधिकतम 3 गैर-मुस्लिम। सर्वे और पंजीकरण की प्रक्रिया सख्त।
बीजेपी इसे “सुधारवादी” बताती है, लेकिन विपक्ष (आरजेडी, कांग्रेस, AIMIM) इसे “मुस्लिम संपत्तियों पर कब्जे” की साजिश मानता है। सुप्रीम कोर्ट ने जून 2025 में कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन कुछ प्रावधानों पर अस्थायी रोक लगाई। तेजस्वी का बयान इसी कानून के खिलाफ विपक्ष की लंबे समय से चली आ रही आलोचना का हिस्सा है। हालांकि तेजस्वी के बयान ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी।
बीजेपी ने इसे “भूमि माफिया” को बढ़ावा देने का सबूत बताया, जबकि आरजेडी ने केंद्र पर “सांप्रदायिक विभाजन” का आरोप लगाया।
“वक्फ बचाओ-संविधान बचाओ”
इससे जुड़ी पिछली घटनाएं 25 अक्टूबर 2025, खगड़िया रैली में आरजेडी MLC कारी शोएब ने तेजस्वी की मौजूदगी में कहा, “तेजस्वी सीएम बने तो वक्फ बिल सहित सभी बिल फाड़ देंगे।” यह वीडियो वायरल हो गया, जिससे विवाद बढ़ा।
जून 2025, पटना रैली में तेजस्वी ने “वक्फ बचाओ-संविधान बचाओ” प्रदर्शन में कहा था कि महागठबंधन सत्ता में आया तो कानून को “कूड़ेदान में फेंकेंगे।” अप्रैल 2025 में लालू यादव का 2010 का पुराना वीडियो वायरल, जहां वे वक्फ बिल का समर्थन करते दिखे, लेकिन अब आरजेडी विरोधी रुख पर है।
मुस्लिम-यादव समीकरण को मजबूत
यह बयान बिहार चुनावों (फेज 1: 31 अक्टूबर, फेज 2: 7 नवंबर, नतीजे: 14 नवंबर) में मुस्लिम-यादव समीकरण को मजबूत कर सकता है, लेकिन बीजेपी इसे “असंवैधानिक” बताकर हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोशिश करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि “वक्फ कानून राज्य स्तर पर लागू होता है, लेकिन केंद्र के कानून को “फेंकना” व्यावहारिक नहीं—यह सुप्रीम कोर्ट के पास चुनौती का विषय बनेगा। कुल मिलाकर, यह चुनावी ध्रुवीकरण का नया मोड़ है, जो सीमांचल में निर्णायक साबित हो सकता है।